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अंतरराष्ट्रीय मानव तस्करी और साइबर ठगी रैकेट का पर्दाफाश, NIA ने दुर्गापुर से गुलाम जामा को किया गिरफ्तार

अंतरराष्ट्रीय मानव तस्करी और साइबर ठगी रैकेट का पर्दाफाश, NIA ने दुर्गापुर से गुलाम जामा को किया गिरफ्तार

नई दिल्ली, दिल्ली

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने अंतरराष्ट्रीय मानव तस्करी और साइबर धोखाधड़ी से जुड़े एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर से गुलाम जामा उर्फ लक्की को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसी के अनुसार, आरोपी ऐसे गिरोह का सक्रिय सदस्य है, जो भारतीय युवाओं को विदेश में बेहतर नौकरी और अधिक वेतन का झांसा देकर गैरकानूनी तरीके से म्यांमार भेजता था। वहां पहुंचने के बाद इन युवकों से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साइबर ठगी कराई जाती थी। गिरफ्तारी के बाद आरोपी को अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे तीन दिन के ट्रांजिट रिमांड पर लेकर एनआईए की टीम दिल्ली रवाना हो गई।

जांच में सामने आया है कि यह गिरोह युवाओं को पहले थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक भेजता था और फिर अवैध रास्तों से म्यांमार पहुंचाता था। वहां साइबर अपराध से जुड़े संगठित गिरोहों के लिए उनसे ऑनलाइन धोखाधड़ी कराई जाती थी। आरोप है कि पीड़ित युवकों का इस्तेमाल अमेरिका, कनाडा और यूनाइटेड किंगडम के नागरिकों को क्रिप्टोकरेंसी में निवेश का लालच देकर ठगी करने के लिए किया जाता था। इस नेटवर्क के जरिए बड़ी संख्या में विदेशी नागरिकों को निशाना बनाया गया।

एनआईए के अनुसार, गुलाम जामा इस पूरे नेटवर्क में भर्ती और मानव तस्करी की कड़ी के रूप में काम करता था। वह युवाओं को नौकरी का झांसा देकर विदेश भेजने की व्यवस्था करता था। आरोपी मूल रूप से छत्तीसगढ़ के जगदलपुर का रहने वाला है और पिछले दो वर्षों से पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर में रह रहा था। उसकी ससुराल भी दुर्गापुर में होने के कारण वह लंबे समय से वहीं से अपनी गतिविधियां संचालित कर रहा था।

सोमवार सुबह एनआईए की छह सदस्यीय टीम स्थानीय पुलिस के सहयोग से आरोपी के ठिकाने पर पहुंची। करीब तीन घंटे तक चली तलाशी के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, मोबाइल फोन, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और डिजिटल साक्ष्य बरामद किए गए। इसके बाद गुलाम जामा को हिरासत में लेकर अदालत में पेश किया गया और ट्रांजिट रिमांड पर दिल्ली ले जाया गया।

यह मामला हरियाणा के चरखी दादरी में दर्ज एक शिकायत से जुड़ा है। सातौर गांव निवासी सुनील कुमार ने 15 नवंबर 2025 को साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई थी कि उन्हें विदेश में नौकरी का झांसा देकर म्यांमार भेजा गया, जहां उनसे साइबर धोखाधड़ी कराई गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए एनआईए ने 21 दिसंबर 2025 को जांच अपने हाथ में ले ली थी।

जांच के दौरान एजेंसी को इस गिरोह के तार पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों और विदेशों तक जुड़े मिले। एनआईए अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपियों, विदेशी संपर्कों और आर्थिक लेन-देन की जांच कर रही है। एजेंसी का मानना है कि इस कार्रवाई से अंतरराष्ट्रीय मानव तस्करी और साइबर अपराध के एक बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है तथा आने वाले दिनों में इस मामले में और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं।

Maniish Narayan

Maniish Narayan

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