हर फिल्म में महिला किरदार बने कहानी की जान
मुंबई, महाराष्ट्र। संजय लीला भंसाली हिंदी सिनेमा के उन चुनिंदा निर्देशकों में गिने जाते हैं, जिन्होंने अपनी फिल्मों में महिला किरदारों को सबसे अधिक प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया है। उनकी फिल्मों में हीरोइनें केवल प्रेम कहानी का हिस्सा नहीं होतीं, बल्कि पूरी कहानी को अपने दम पर आगे बढ़ाती हैं। यही वजह है कि पारो, चंद्रमुखी, लीला, मस्तानी, रानी पद्मावती और गंगूबाई जैसे किरदार आज भी दर्शकों के दिलों में जिंदा हैं।
'देवदास' की पारो और चंद्रमुखी बनीं अमर किरदार
साल 2002 में रिलीज हुई 'देवदास' भंसाली के करियर की सबसे प्रतिष्ठित फिल्मों में शामिल है। फिल्म में ऐश्वर्या राय ने पारो और माधुरी दीक्षित ने चंद्रमुखी का किरदार निभाया। दोनों के अभिनय और भावनात्मक संवादों ने फिल्म को क्लासिक बना दिया। चंद्रमुखी का संवाद "प्यार का कारोबार तो बहुत बार किया है... मगर प्यार सिर्फ एक बार" आज भी दर्शकों की जुबान पर रहता है।
'राम-लीला' ने दीपिका को दिलाई नई पहचान
साल 2013 में आई 'गोलियों की रासलीला राम-लीला' में दीपिका पादुकोण ने लीला के किरदार से दर्शकों का दिल जीत लिया। फिल्म का संवाद "बेशरम, बदतमीज, खुदगर्ज होता है... पर प्यार तो ऐसा ही होता है" युवाओं के बीच बेहद लोकप्रिय हुआ। रणवीर सिंह और दीपिका की जोड़ी के साथ फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर भी शानदार प्रदर्शन किया।
'बाजीराव मस्तानी' की दो मजबूत महिलाएं
'बाजीराव मस्तानी' में प्रियंका चोपड़ा की काशीबाई और दीपिका पादुकोण की मस्तानी दोनों ने अपने अभिनय से अलग पहचान बनाई। काशीबाई का भावुक संवाद "आप हमसे हमारी जिंदगी मांग लेते... पर आपने हमारा गुरूर छीन लिया" आज भी सबसे चर्चित फिल्मी संवादों में गिना जाता है। वहीं मस्तानी के दृढ़ और निडर व्यक्तित्व ने दर्शकों को खूब प्रभावित किया।
'पद्मावत' में रानी पद्मावती की वीरता
साल 2018 में रिलीज हुई 'पद्मावत' में दीपिका पादुकोण ने रानी पद्मावती का किरदार निभाया। उनका संवाद "राजपूती कंगन में उतनी ही ताकत है जितनी राजपूती तलवार में" महिला शक्ति और स्वाभिमान का प्रतीक बन गया। फिल्म की भव्यता के साथ-साथ पद्मावती के किरदार को भी खूब सराहा गया।
'गंगूबाई काठियावाड़ी' ने आलिया भट्ट को नई ऊंचाई दी
साल 2022 में आई 'गंगूबाई काठियावाड़ी' में आलिया भट्ट ने अपने दमदार अभिनय से आलोचकों और दर्शकों दोनों की प्रशंसा हासिल की। उनका संवाद "जब शक्ति, संपत्ति और सद्बुद्धि तीनों ही औरतें हैं, तो इन मर्दों के किस बात का गुरूर?" सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ और फिल्म की पहचान बन गया।
'हीरामंडी' से OTT पर भी बरकरार रहा भंसाली का जादू
भंसाली ने वेब सीरीज 'हीरामंडी' के जरिए ओटीटी पर भी अपनी अलग छाप छोड़ी। मनीषा कोईराला, सोनाक्षी सिन्हा, अदिति राव हैदरी, ऋचा चड्ढा, संजीदा शेख और शर्मिन सहगल जैसे कलाकारों ने अपने प्रभावशाली अभिनय से दर्शकों का दिल जीता। सीरीज के संवाद, संगीत और भव्य सेट लंबे समय तक चर्चा का विषय बने रहे।
महिला किरदारों को नई ऊंचाई देने वाले निर्देशक
संजय लीला भंसाली की फिल्मों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि उनकी महिला पात्र आत्मविश्वास, साहस, भावनात्मक गहराई और नेतृत्व क्षमता का प्रतीक होती हैं। यही कारण है कि उनकी फिल्मों के संवाद, किरदार और कहानियां वर्षों बाद भी दर्शकों के बीच उतनी ही लोकप्रिय हैं। हिंदी सिनेमा में मजबूत महिला-केंद्रित फिल्मों की बात हो तो भंसाली का नाम सबसे प्रमुख निर्देशकों में लिया जाता है।
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