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ना पत्नी का साथ रहा, ना एयरहोस्टेस से रिश्ता बना, अकेलेपन में बीते फिरोज खान के आखिरी साल

ना पत्नी का साथ रहा, ना एयरहोस्टेस से रिश्ता बना, अकेलेपन में बीते फिरोज खान के आखिरी साल

मुंबई, महाराष्ट्र

हिंदी सिनेमा के सबसे स्टाइलिश और करिश्माई अभिनेताओं में गिने जाने वाले फिरोज खान ने अपनी फिल्मों के साथ-साथ अपनी निजी जिंदगी को लेकर भी खूब सुर्खियां बटोरीं। 'धर्मात्मा', 'कुर्बानी' और 'जांबाज' जैसी सुपरहिट फिल्मों से पहचान बनाने वाले फिरोज खान की प्रेम कहानी भी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं रही। शादीशुदा होने के बावजूद वह एक एयरहोस्टेस के प्यार में पड़ गए, लेकिन किस्मत ने ऐसा मोड़ लिया कि अंत में न तो उनका वैवाहिक रिश्ता बचा और न ही नया रिश्ता मुकाम तक पहुंच सका।

बताया जाता है कि 1960 के दशक की शुरुआत में एक पार्टी के दौरान फिरोज खान की मुलाकात सुंदरी से हुई थी। सुंदरी अपनी पहली शादी से अलग हो चुकी थीं और उनकी एक बेटी भी थी। पहली मुलाकात में ही दोनों एक-दूसरे के करीब आ गए। करीब पांच साल तक एक-दूसरे को डेट करने के बाद दोनों ने वर्ष 1965 में शादी कर ली। इस शादी से उनके दो बच्चे हुए—बेटी लैला खान और बेटे फरदीन खान, जिन्होंने बाद में बॉलीवुड में अभिनेता के रूप में अपनी पहचान बनाई।

शादी के शुरुआती वर्षों में दोनों का वैवाहिक जीवन अच्छा रहा, लेकिन समय के साथ रिश्तों में दूरियां बढ़ने लगीं। इसी दौरान फिरोज खान का नाम रॉयल परिवार से जुड़ी एयरहोस्टेस ज्योतिका धनराजगीर के साथ जोड़ा जाने लगा। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं और इस रिश्ते का असर फिरोज और सुंदरी के वैवाहिक जीवन पर भी पड़ा। आखिरकार लगभग 20 साल साथ रहने के बाद दोनों ने अलग होने का फैसला किया और उनका तलाक हो गया।

हालांकि, जिस रिश्ते के लिए फिरोज खान ने अपनी शादी दांव पर लगा दी थी, वह भी लंबे समय तक नहीं चल सका। ज्योतिका धनराजगीर से उनका रिश्ता शादी तक नहीं पहुंच पाया और दोनों की राहें अलग हो गईं। इसके बाद फिरोज खान ने दोबारा शादी नहीं की और जीवन के अंतिम वर्षों में काफी हद तक अकेले रहे।

बॉलीवुड में अपनी अलग पहचान बनाने वाले फिरोज खान ने अभिनय के साथ-साथ निर्देशन और फिल्म निर्माण में भी बड़ी सफलता हासिल की। उनकी फिल्मों की भव्यता, स्टाइल और आधुनिक प्रस्तुति ने उन्हें अपने दौर के सबसे अलग फिल्मकारों में शामिल किया। 'कुर्बानी' जैसी फिल्म आज भी हिंदी सिनेमा की क्लासिक फिल्मों में गिनी जाती है।

जीवन के अंतिम दिनों में फिरोज खान मुंबई की चकाचौंध से दूर अपने बेंगलुरु स्थित फार्महाउस में रहने लगे थे। लंबे समय तक कैंसर से जूझने के बाद 27 अप्रैल 2009 को उनका निधन हो गया। उनके निधन के साथ हिंदी सिनेमा ने एक ऐसे अभिनेता, निर्देशक और निर्माता को खो दिया, जिसने अपने अनोखे अंदाज और बेबाक व्यक्तित्व से फिल्म इंडस्ट्री में अलग पहचान बनाई।

Maniish Narayan

Maniish Narayan

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