नई दिल्ली, दिल्ली
देश में प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक की बढ़ती घटनाओं पर रोक लगाने की दिशा में केंद्र सरकार को बड़ा कदम उठाने में सफलता मिली है। विपक्ष के जोरदार हंगामे के बीच लोकसभा ने एंटी पेपर लीक बिल को मंजूरी दे दी। सदन में शोर-शराबे और विरोध के बावजूद विधेयक को पारित कर दिया गया। अब इस बिल को आगे की प्रक्रिया के तहत राज्यसभा में पेश किया जाएगा, जहां इस पर चर्चा होगी और मंजूरी मिलने के बाद इसे कानून का रूप देने की दिशा में अगला कदम बढ़ेगा।
लोकसभा की कार्यवाही के दौरान विपक्षी दलों ने विभिन्न मुद्दों को लेकर सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। हंगामे के बीच भी सरकार ने विधायी कार्य जारी रखा और एंटी पेपर लीक बिल को सदन से पारित करा लिया। सरकार का कहना है कि यह कानून प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता बनाए रखने और अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा करने के उद्देश्य से लाया गया है।
पिछले कुछ वर्षों में देश के कई राज्यों में भर्ती परीक्षाओं और प्रवेश परीक्षाओं के पेपर लीक होने की घटनाएं सामने आई हैं। इन घटनाओं के कारण लाखों अभ्यर्थियों को परीक्षा दोबारा देनी पड़ी और भर्ती प्रक्रियाओं में देरी हुई। सरकार का मानना है कि नए कानून से ऐसे मामलों पर प्रभावी अंकुश लगाने में मदद मिलेगी और परीक्षा प्रणाली में लोगों का विश्वास मजबूत होगा।
प्रस्तावित विधेयक में पेपर लीक, परीक्षा में धांधली, संगठित नकल और अन्य अनियमितताओं में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का प्रावधान किया गया है। इसके तहत दोषी पाए जाने वालों पर कठोर दंड और आर्थिक जुर्माने का प्रावधान किए जाने की बात कही गई है। साथ ही जांच एजेंसियों को ऐसे मामलों में प्रभावी कार्रवाई के लिए अधिक कानूनी अधिकार भी मिल सकते हैं।
लोकसभा से पारित होने के बाद अब यह विधेयक राज्यसभा में पेश किया जाएगा। यदि उच्च सदन से भी इसे मंजूरी मिल जाती है और इसके बाद राष्ट्रपति की स्वीकृति प्राप्त हो जाती है, तो यह देशभर में लागू कानून बन जाएगा।
सरकार का दावा है कि इस कानून से परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और विश्वसनीय बनाया जा सकेगा। वहीं विपक्ष का कहना है कि विधेयक के कुछ प्रावधानों पर विस्तृत चर्चा की आवश्यकता है। अब सभी की निगाहें राज्यसभा की कार्यवाही पर टिकी हैं, जहां इस महत्वपूर्ण विधेयक पर आगे विचार-विमर्श होगा।
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