वॉशिंगटन डीसी / बगदाद
अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। संघर्ष के 13वें दिन ईरान ने इराक के इरबिल शहर में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों को निशाना बनाया, जिससे क्षेत्र में सुरक्षा चिंताएं और गहरा गई हैं। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान के हमलों से जहाजों और अन्य अमेरिकी संपत्तियों को होने वाले नुकसान की भरपाई विदेशों में जब्त ईरानी संपत्तियों से कराई जाएगी।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इराक के कुर्दिस्तान क्षेत्र की राजधानी इरबिल में कम से कम सात विस्फोटों की आवाजें सुनी गईं। हमले के दौरान कई ड्रोन को भी मार गिराए जाने की जानकारी सामने आई है। सुरक्षा कारणों से इरबिल हवाई अड्डे पर कुछ समय के लिए उड़ान संचालन प्रभावित हुआ। हालांकि शुरुआती रिपोर्टों में किसी बड़े जान-माल के नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है।
राष्ट्रपति ट्रंप ने संकेत दिया कि अमेरिका ईरान के खिलाफ अपनी सैन्य रणनीति पर काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि फिलहाल उनका ध्यान युद्धविराम या शांति वार्ता पर नहीं, बल्कि अमेरिकी हितों और सैन्य ठिकानों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर है। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि यदि अमेरिकी जहाजों या संपत्तियों को नुकसान पहुंचता है तो उसकी आर्थिक भरपाई ईरान की जब्त विदेशी संपत्तियों से की जाएगी।
इस बीच अमेरिकी सेना ने भी ईरान से जुड़े लक्ष्यों पर कार्रवाई जारी रखी है। रिपोर्टों के अनुसार, ईरानी बंदरगाह की ओर बढ़ रहे 'दिशा' नामक एक जहाज पर अमेरिकी बलों ने हमला किया। बताया गया कि जहाज के इंजन रूम को निशाना बनाया गया, जिसके बाद जहाज से आपातकालीन सहायता (डिस्ट्रेस कॉल) भेजी गई। जहाज पर लगभग 30 नाविक सवार बताए गए हैं।
लाल सागर और बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य में भी तनाव बना हुआ है। हूती समूह ने दावा किया है कि बाब-अल-मंदेब मार्ग सामान्य जहाजों के लिए खुला है और उनकी नाकेबंदी केवल सऊदी अरब से जुड़े जहाजों तक सीमित है। इसके बावजूद अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियां अतिरिक्त सतर्कता बरत रही हैं और क्षेत्र में सुरक्षा जोखिमों पर लगातार नजर रखे हुए हैं।
पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी दिखाई दे रहा है। कच्चे तेल की कीमतें लगभग 100 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अस्थिरता बढ़ी है। ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि क्षेत्रीय संघर्ष और गहराता है तो तेल आपूर्ति तथा वैश्विक व्यापार पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।
अमेरिका और ईरान के बीच जारी यह टकराव अब केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इराक, लाल सागर और खाड़ी क्षेत्र तक फैलता दिखाई दे रहा है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर इस बात पर बनी हुई है कि आने वाले दिनों में हालात कूटनीतिक समाधान की ओर बढ़ते हैं या सैन्य तनाव और तेज होता है।
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