Fed Meeting के बाद सोने-चांदी में आएगा बड़ा उतार-चढ़ाव? एक्सपर्ट ने बताए अहम लेवल्स, जानें निवेश की 5 बड़ी रणनीतियां
Maniish Narayan 4 days ago
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नई दिल्ली, दिल्ली
अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) की 29 जुलाई 2026 की अहम मौद्रिक नीति बैठक से पहले वैश्विक सर्राफा बाजार में हलचल तेज हो गई है। निवेशकों की नजर अब इस बात पर टिकी है कि फेड ब्याज दरों को लेकर क्या फैसला लेता है और उसका असर सोने-चांदी की कीमतों पर किस तरह दिखाई देगा। महंगाई, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और वैश्विक भू-राजनीतिक तनावों के बीच निवेशकों में असमंजस का माहौल बना हुआ है।
कमोडिटी बाजार की विशेषज्ञ और RMoney की रिसर्च मैनेजर मोमिता सामंता का मानना है कि फेड का फैसला आने से पहले बाजार में कोई भी बड़ी खरीदारी करना जोखिम भरा हो सकता है। उनके अनुसार, निवेशकों को जल्दबाजी से बचते हुए फैसले के बाद बाजार की दिशा स्पष्ट होने का इंतजार करना चाहिए।
फेड बैठक से पहले क्यों बढ़ी बाजार की चिंता?
विशेषज्ञों के अनुसार, फेडरल रिजर्व की हर बैठक वैश्विक कमोडिटी बाजार के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती है। ब्याज दरों में बदलाव का सीधा असर डॉलर, बॉन्ड यील्ड और सोने-चांदी जैसी कीमती धातुओं पर पड़ता है। मोमिता सामंता बताती हैं कि पिछली बार फेड की ओर से सख्त रुख अपनाने के संकेत मिलने के बाद सोने की कीमतों में तेज गिरावट देखने को मिली थी। इसी वजह से इस बार भी निवेशक सतर्क हैं और कई ट्रेडर्स बैठक से पहले अपनी पोजीशन कम कर रहे हैं।
फेड के फैसले के दो संभावित परिदृश्य
विशेषज्ञों के मुताबिक इस बैठक में दो संभावनाएं सबसे अधिक चर्चा में हैं। पहली, यदि फेड ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करता है तो बाजार में पहले से बनी उम्मीद के कारण सोने और चांदी में सीमित तेजी देखने को मिल सकती है। हालांकि मुनाफावसूली के चलते शुरुआती गिरावट भी संभव है।
दूसरी ओर, यदि फेड 25 बेसिस प्वाइंट की ब्याज दर बढ़ोतरी का फैसला करता है तो सोने और चांदी दोनों पर दबाव बढ़ सकता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 3,980 डॉलर प्रति औंस और चांदी 55 डॉलर प्रति औंस के आसपास तक फिसलने की आशंका जताई गई है।
आम निवेशकों के लिए क्या है सलाह?
मोमिता सामंता का कहना है कि छोटे निवेशकों को फेड के फैसले से पहले नई पोजीशन लेने से बचना चाहिए। उनके अनुसार, फैसले के बाद 24 से 48 घंटे तक बाजार में तेज उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। इस दौरान एल्गोरिदमिक ट्रेडिंग और भारी वोलैटिलिटी के कारण कीमतों में अचानक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। इसलिए बाजार स्थिर होने के बाद ही निवेश करना अपेक्षाकृत सुरक्षित रणनीति होगी।
बदल रहा है सोने का पारंपरिक ट्रेंड
विशेषज्ञों का कहना है कि हाल के वर्षों में सोने का व्यवहार पहले की तुलना में बदलता दिखाई दे रहा है। पहले जहां बॉन्ड यील्ड बढ़ने पर सोने में कमजोरी आती थी, वहीं अब केंद्रीय बैंकों की लगातार खरीदारी के कारण ऊंची ब्याज दरों के बावजूद सोना मजबूत बना हुआ है। इसके अलावा शेयर बाजार और सोने के बीच पारंपरिक संबंध भी काफी कमजोर पड़ गया है, जिससे सोना एक स्वतंत्र सुरक्षित निवेश विकल्प के रूप में उभर रहा है।
MCX और COMEX के अहम स्तर
विशेषज्ञों के अनुसार, MCX पर सोने के लिए ₹1,40,500 महत्वपूर्ण सपोर्ट माना जा रहा है। इसके नीचे जाने पर कीमतें ₹1,37,550 तक फिसल सकती हैं। वहीं ₹1,45,500 के ऊपर टिकने पर ₹1,48,000 से ₹1,50,000 तक तेजी की संभावना बन सकती है।
चांदी के लिए MCX पर ₹2,19,000 प्रमुख सपोर्ट स्तर है। इसके टूटने पर कीमत ₹2,14,000 से ₹2,10,000 तक आ सकती है, जबकि ₹2,37,000 के ऊपर मजबूती मिलने पर तेजी का नया दौर शुरू हो सकता है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार COMEX में सोने के लिए 4,020 डॉलर और चांदी के लिए 55 डॉलर महत्वपूर्ण सपोर्ट स्तर माने जा रहे हैं। इन स्तरों के ऊपर बने रहने पर बाजार में मजबूती कायम रह सकती है, जबकि इनके टूटने पर कीमतों में और गिरावट देखने को मिल सकती है।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि फेडरल रिजर्व की बैठक का फैसला आने के बाद ही सोने और चांदी की अगली दिशा स्पष्ट होगी। ऐसे में निवेशकों को भावनाओं में आकर निर्णय लेने के बजाय सोच-समझकर और जोखिम प्रबंधन के साथ निवेश करना चाहिए।
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Maniish Narayan
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