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भारत में डेंगू के 4 स्ट्रेन एक साथ, 15 जुलाई से बढ़ा खतरा; अगले साल तक आ सकती है वैक्सीन

भारत में डेंगू के 4 स्ट्रेन एक साथ, 15 जुलाई से बढ़ा खतरा; अगले साल तक आ सकती है वैक्सीन

भारत में डेंगू के चारों स्ट्रेन एक साथ सक्रिय, 8 राज्यों में बढ़ा खतरा; अगले साल तक आ सकती है वैक्सीन

नई दिल्ली, दिल्ली: भारत में डेंगू को लेकर चिंता बढ़ाने वाली एक नई रिपोर्ट सामने आई है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) की एक स्टडी में खुलासा हुआ है कि देश के आठ राज्यों में डेंगू के चारों सीरोटाइप (DENV-1, DENV-2, DENV-3 और DENV-4) एक साथ फैल रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि एक ही क्षेत्र में चारों स्ट्रेन की मौजूदगी से संक्रमण और गंभीर मामलों का खतरा बढ़ सकता है। इसी बीच राहत की खबर यह है कि भारत अगले साल तक अपनी पहली डेंगू वैक्सीन उपलब्ध कराने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है।

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (NIV), पुणे द्वारा 2023 से 2025 के बीच किए गए अध्ययन में देश के 25 राज्यों की 45 प्रयोगशालाओं से एकत्र किए गए 6,889 डेंगू नमूनों की जांच की गई। अध्ययन के दौरान वैज्ञानिकों ने वायरस के अलग-अलग स्ट्रेन की पहचान की और उनके प्रसार का विश्लेषण किया।

रिपोर्ट के मुताबिक, आंध्र प्रदेश, गुजरात, हरियाणा, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल ऐसे राज्य हैं, जहां डेंगू के चारों सीरोटाइप एक साथ पाए गए हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, यह स्थिति सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकती है, क्योंकि अलग-अलग स्ट्रेन से दोबारा संक्रमण होने पर गंभीर डेंगू होने की आशंका बढ़ जाती है।

अध्ययन में यह भी सामने आया कि देश के अन्य 15 राज्यों में डेंगू के तीन-तीन स्ट्रेन सक्रिय हैं। आंकड़ों के अनुसार DENV-2 सबसे अधिक प्रभावी स्ट्रेन रहा, जो कुल संक्रमण के 51 प्रतिशत मामलों के लिए जिम्मेदार पाया गया। इसके बाद DENV-3 का हिस्सा 13 प्रतिशत, DENV-1 का 7 प्रतिशत और DENV-4 का लगभग 1 प्रतिशत दर्ज किया गया। शेष मामलों में नमूनों की पहचान या वर्गीकरण अलग श्रेणियों में रहा।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि डेंगू के चारों सीरोटाइप की मौजूदगी निगरानी और रोकथाम की आवश्यकता को और बढ़ा देती है। यदि कोई व्यक्ति पहले एक स्ट्रेन से संक्रमित हो चुका है और बाद में दूसरे स्ट्रेन से संक्रमित होता है, तो गंभीर डेंगू या डेंगू हेमोरेजिक फीवर का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए समय पर जांच, उपचार और मच्छरों की रोकथाम बेहद जरूरी है।

इसी बीच भारत में डेंगू वैक्सीन विकसित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण प्रगति हो रही है। स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, यदि परीक्षण और नियामकीय प्रक्रियाएं तय समय पर पूरी होती हैं, तो अगले वर्ष तक डेंगू की स्वदेशी वैक्सीन उपलब्ध कराई जा सकती है। यह वैक्सीन डेंगू की रोकथाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है और हर साल बढ़ते मामलों को नियंत्रित करने में मददगार साबित हो सकती है।

विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की है कि वे डेंगू से बचाव के लिए घर और आसपास पानी जमा न होने दें, पूरी बाजू के कपड़े पहनें, मच्छरदानी और रिपेलेंट का इस्तेमाल करें तथा तेज बुखार, सिरदर्द, शरीर दर्द या प्लेटलेट्स कम होने जैसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। मानसून के मौसम में सतर्कता और समय पर इलाज ही डेंगू से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय माना जा रहा है।

Maniish Narayan

Maniish Narayan

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